क्यों काशी से गंगाजल को अपने घर नहीं ले जाना चाहिए?
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के मुताबिक, काशी मोक्ष की नगरी है और कई लोग व जीव-जन्तु अंतिम समय में यहां आते हैं। मान्यताओं के अनुसार, यहां बड़ी संख्या में शवदाह होते हैं जिनकी राख गंगा में विसर्जित होती है इसलिए काशी से गंगाजल/मिट्टी ले जाने पर कई जीव अनजाने में साथ चले जाते हैं जिससे उनका मृत्यु-पुनर्जन्म चक्र बाधित होता है।
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