माइक्रो स्ट्रेस क्या है?
डॉक्टर सुभाष गिरि के अनुसार, लगातार बना रहने वाला माइक्रो स्ट्रेस (रोज़मर्रा की छोटी-छोटी चिंताएं) शरीर के तनाव हॉर्मोन को बढ़ाता है। यह तब होता है जब व्यक्ति पर उम्मीदों का दबाव ज़्यादा हो, समय कम और खुद के लिए वक्त न बचे। व्यक्ति मानसिक रूप से थकान/उदासी महसूस करता है। यह स्थिति धीरे-धीरे चिंता/डिप्रेशन का कारण बन सकती है।
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