गर्मी से देश को ₹24 लाख करोड़ का नुकसान! घटी लेबर प्रोडक्टिविटी, 2030 तक खतरे में GDP का 4.5%
भारत में बढ़ती गर्मी से कामकाज़ी घंटों और प्रोडक्टिविटी पर बड़ा असर पड़ रहा है। लैंसेट काउंटडाउन के मुताबिक, 2024 में भीषण गर्मी के कारण देश ने 247 अरब संभावित लेबर घंटे गंवाए। McKinsey का अनुमान है कि 2030 तक गर्मी-उमस से भारत की GDP का 2.5%-4.5% हिस्सा जोखिम में पड़ सकता है यानी सालाना ₹14.3-23.8 लाख करोड़ का नुकसान हो सकता है।
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