गुरुग्राम कभी खेती की ज़मीन था, अब मॉनसून में इसकी सड़कें नदियां कैसे बन जाती हैं?
1960 में गु्रुग्राम खेतों, गांवों, तालाबों से घिरा शहर था लेकिन यहां फैक्ट्रियां/मकान/सड़कें बनती गईं और मिट्टी के लिए पानी सोखने की जगह कम हो गई। खेतों और तालाबों को शहर का 'स्पंज' मानिए जो पानी सोखता है। जब ये खत्म हो जाते हैं तो पानी सोखने की जगह नहीं बचती और पानी सड़कों और नालों में भर जाता है।
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