आधार बनवाते समय फर्ज़ी जानकारियां दीं तो कितनी सज़ा हो सकती है?
यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति आधार पंजीकरण के समय फर्ज़ी डेमोग्राफिक या बायोमेट्रिक जानकारी उपलब्ध कराता है तो यह एक अपराध है। अथॉरिटी के अनुसार, ऐसा करने वाले व्यक्ति को 3 साल तक की जेल की सज़ा या ₹10,000 जुर्माना या दोनों की सज़ा भुगतनी पड़ सकती है।
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