No-cost EMI के नाम पर चुपके से ग्राहकों से वसूली जाती है कितनी राशि?
आर्थिक विशेषज्ञ नो-कॉस्ट ईएमआई को मार्केटिंग का फंडा बताते हैं। आमतौर पर नो-कॉस्ट ईएमआई में सामानों के मूलधन में ब्याज पहले से शामिल होता है। वहीं, ऋणदाता ग्राहकों से प्रोसेसिंग फीस, ब्याज पर 18% जीएसटी और ईएमआई चुकाने में देरी होने पर 30%-40% तक फाइन वसूलते हैं। आरबीआई ने भी कहा है कि नो-कॉस्ट ईएमआई जैसी कोई अवधारणा नहीं है।
read more at News18 हिंदी


